नवागढ़ (नंदपुर)

बुन्देली धरा पर प्रागैतिहासिक (5 लाख वर्ष से वर्तमान तक) साक्षयो को सँजोये अतिशय क्षेत्र, जहाँ तीसरी शदी से जैन संतो का आवागमन होने लगा था। गुप्तकाल मे स्थापित नवागढ़ प्राचीन नंदपुर के भगवान अरनाथ स्वामी की आतिशयकारी एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण विश्व मे एक मात्र अतिशय क्षेत्र है।

पहुच मार्ग

☀झाँसी से टीकमगढ़, अजनोर होकर 130 कि.मी.
☀ललितपुर से महरोनी, सोजना होकर 65 कि.मी.
☀सागर से शाहगढ़, बड़ागाँव होकर 110 कि.मी.
☀सिद्धक्षेत्र द्रोणगिरी से 40 कि.मी.
☀सिद्धक्षेत्र अहारजी से 35 कि.मी.
☀सिद्धक्षेत्र पपोरा जी से 25 कि.मी.

सुविधाएं

☀ धर्मशाला (निशुल्क)
☀ भोजनशाला (निशुल्क)
☀ यातायात व्यवस्था
☀ विवाह एवं समारोह व्यवस्था
☀ संग्रहालय
☀ चिदानंद साधनाश्रम
☀ नवागढ़ औषधालय (निशुल्क)
☀ लाइब्रेरी एवं शोध केंद्र

फोटो गेलरी

मंदिर मूलनायक : नवागढ़ क्षेत्र मंदिर
पुरातत्वीय हेरिटेज : शीर्ष, शैल चित्र, गुफाये, पाषाण औजार, धातु की पुरासंपदा, चंदेल वावड़ी
संत-समागम : आचार्य
विशेष आयोजन एवं पर्यटन स्थल : चिकित्सा शिविर, वार्षिक मेला
चक्रव्रती का वैभव
क्षेत्र का साहित्य एवं आलेख : साहित्य, न्यूज पेपर, पत्रिका
सांस्क्रतिक गतिविधियाँ : वीडिओ
क्षेत्र के आराधक : आजीवन पूजा-विधान, विशेष अतिथि

उत्तर प्रदेश की तीर्थ संपन्न वसुंधरा पर बुंदेलखंड अंचल में सुशोभित श्री 1008 अतिशय क्षेत्र नवागढ़ (नंदपुर) की आध्यात्मिक ऊर्जा से अलंकृत धरती पर भूगर्भ से प्राप्त 900 वर्ष प्राचीन भगवान अरनाथ स्वामी की आतिशयकारी प्रतिमा है।

क्षेत्र के अतिशय
विध्वंस लीला को झेलते हुए मूलनायक अरनाथ भगवान की प्रतिमा का सुरक्षित रहना स्वयं में अतिशय है । ग्रामीण अंचल एवं जैन - जैनेतर समाज की अगाध आस्था भगवान से जुड़ी है। प्राकृतिक आपदा , पशु पीड़ा का निदान भक्तगणों को निष्काम साधना से निरंतर प्राप्त होता है। आज भी ग्रामवासी अपना कार्य आरंभ करने के पूर्व प्रभु के चरणों में धोक देने आते हैं।

वार्षिक मेला
क्षेत्र का वार्षिक मेला भगवान अरनाथ के मोक्ष कल्याणक चैत्र मास की अमावस्या को होता है। इसी दिन 8 अप्रैल 1959 ईस्वी को भगवान अरनाथ स्वामी भूगर्भ से प्रकट हुए थे ।